अमरीका और चीन की तनातनी में फंस गया पाकिस्तान

Pakistan gets caught in America and China

कोरोना वायरस के प्रकोप से पहले तक पाकिस्तान (Pakistan) विदेश नीति के मोर्चे पर आरामदायक स्थिति में था, खासकर अमेरिका (America) और चीन ( China) के साथ संतुलन बनाकर रखने के मामले में उसे कोई परेशानी नहीं आ रही थी। वह तालिबान पर अपने प्रभाव के चलते अमेरिका से वैश्विक आतंकवाद वित्त पोषण पर निगरानी रखने वाले फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) से छूट का लाभ ले रहा था। लेकिन चीन की ओर इमरान खान का झुकाव अब उन्हें ही भारी पड़ने वाला है।

 

 

 

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान का चीन प्रेम उनके ही विदेश विभाग को रास नहीं आ रहा। खुद उनकी सरकार पाकिस्तान (Pakistan) के चीन को समर्थन देने के पक्ष में नजर नहीं आ रही। पाकिस्तान के विदेश विभाग और इमरान खान के बीच भी खासी ठन गई है। पाकिस्तान पर चीन ( China) को लेकर अपनी नीति बदलने का दबाव दिखाई देने लगा है। भारत-चीन सीमा विवाद के बीच चीन के वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ने पर पाकिस्तान की चिंता भी बढ़ गई है।

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विदेश विभाग ने दी इमरान को नसीहत

विदेश विभाग ने तो इमरान खान से ये तक कह दिया है कि चीन ( China) के साथ वे अपने रिश्तों की रूपरेखा पर फिर से विचार करें। इसका पहला संकेत को पाकिस्तान को मिल ही चुका है, यूरोपीय संघ ने पाकिस्तान की राष्ट्रीय विमानन कंपनी पीआईए पर प्रतिबंध जो लगा दिया है। और तो और अब यूरोपीय देश चीन के कूटनीतिक स्तर पर बहिष्कार की योजना भी बना रहे हैं तो ऐसे में पाकिस्तान को डर लग रहा है कि कहीं चीन की हरकतों की सजा उसको न भुगतनी पड़ जाए।

 

 

 

China के प्रति पा​किस्ता​नियों में हैं गुस्सा

वहीं खुद पाकिस्तान (Pakistan) में बलूचिस्तान और गिलगित बाल्टिस्तान में वैसे ही चीन के प्रति गुस्सा है क्योंकि पाकिस्तान के एक धड़े को लगता है चीन सीपीईसी के लिए उसके संसाधनों का दोहन कर रहा है। इस परियोजना में काम करने के लिए चीन से सस्ते श्रमिक बुलाए जा रहे हैं। चीन यहां की परंपराओं की भी सम्मान नहीं कर रहा। पाकिस्तानी हुक्मरान लगातार लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के हालातों की जानकारी ले रहे हैं। 

 

 

 

पा​किस्तान को चुकानी होगी चीन के समर्थन की कीमत

इस बीच पाकिस्तान (Pakistan) के विदेश मंत्री कहते हैं कि पाकिस्तान ने फिर से वन चाइना पालिसी का समर्थन किया है और कहा है कि वह हांगकांग, ताइवान, तिब्बत और जिनझियांग चीन का समर्थन करता है।अमरीका (America) को नाराज करने के बाद पाकिस्तान को सीपैक से कितना फायदा होगा इस बारे में कुछ अभी नहीं कहा जा सकता है लेकिन अगर वह एक्शन प्लान के हिसाब से नहीं कर पाया तो एफएटीएफ ब्लैक लिस्ट का उसे सामना करना पड़ सकता है। कहा जा रहा है कि चीन से अगर दोस्ती पाकिस्तान ने जारी रखी तो दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की उसको भी नाराजगी झेलनी पड़ सकती है।

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